कच्ची ब्रेड नहीं , टोस्ट बेहतर है-हम सब इस बात को अच्छी तरह अनुभव से जानते हैं कि कच्ची ब्रेड अच्छी तरह सिंका हुआ टोस्ट हमें पेट में हल्का लगता है। हम ऐसे ४-६ टोस्ट भी खा लें तो हमें पेट में भारी नहीं लगते और शीघ्र पच भी जाते हैं लेकिन जब हम कच्ची ब्रेड खाते हें तो पेट काफी देर तक भारी रहता है और जल्दी भूख नहीं लगती जबकि टोस्ट खाने के बाद शीघ्र भूख लगने की संभावना होती है। कच्ची ब्रेड अध्पका स्टार्च होने के कारण पेट में काफी देर तक रहकर सड़ता है और कब्ज, गैस जैसी बीमारियाँ पैदा करता है, जबकि पूरा सिंका हुआ टोस्ट ऐसी समस्या नहीं पैदा करता। कच्ची ब्रेड के साथ अगर मक्खन है तो वह और भारी होकर पचने में अध्कि देर लगाएगा और अगर उस पर फलों का जाम, शहद या चीनी लगी है तो उसके सड ने की पूरी गारंटी है क्योंकि पाचन के नियमानुसार फलों की शर्करा अन्न के स्टार्च के साथ सड ती है, पचती नहीं। अगर आपने इसके साथ चीज या पनीर जोड दिया है तब तो आपने अपच, सड न, एसीडिटी और गैस की आपने पूरी व्यवस्था कर ली। मेरी बातों पर यकीन नहीं करें आप स्वयं खायें, अनुभव करें और विश्वास करें। ब्रेड और दूध्, ब्रेड और अंडे भी पेट में ग लत मेल के कारण भयंकर रूप से सड ते हैं।|
खाखरा - राजस्थान और गुजरात में पतली रोटी को अच्छी तरह सेंककर पापड़ की तरह करारा बनाया जाता है जिसे खाखरा कहते हैं। यह पूरा सिंक जाने के कारण बहुत हल्का और सुपाच्य होता है परंतु यह अगर घर में चोकर समेत आटे से बनाये जायें तो ही बेहतर है। बाजार में मिलने वाला खाखरा मैदे की तरह बारीक आटे से बनाया जाता है जिससे उसमें खुज्जा ;रेशेद्ध या फाइबर नहीं के बराबर होते हैं। ऐसे खाखरे शीघ्र पच तो जाते हैं परंतु उसमें पोषण तत्व नहीं के बराबर होते हैं। आजकल रोटी बनाने वाली बिजली मशीन से ऐसे खाखरे घर में बनाये जा सकते हैं। ये बिस्कुट के सर्वश्रेष्ठ विकल्प हैं।|
बिस्कुट तला हुआ आहार है - सभी महिलायें अच्छी तरह जानती है कि बिस्कुट बनाने के लिये हमें १ किलो मैदे के साथ करीब आध किलो डालडा या घी मिलाना पड़ता है और उतनी ही चीनी भी। फिर हम इसे आधे घंटे तक सेंकते हैं। कचौडी, समोसा बाहर से तलते हैं। बिस्कुट भीतर से तलते हैं इसलिये ये तली हुई मैदे की मठ्ठी की तरह स्वादिष्ट लगता है। निश्चय ही धीरे धीरे सिंकने से इसमें स्टार्च का शर्करा के रूप में रूपांतरण पूरा होता है परंतु डालडा, घी के कारण यह भीतर से तल जाता है जिससे यह पेट में बहुत देर से पचता है और चीनी साथ में होने के कारण यह शीघ्र सड भी जाता है। बिस्कुट पेट से हमेशा सड कर ही निकलता है इसी कारण बड़ों और बच्चों के पेट में कीडे पैदा होते हैं। हमारे दोनों बच्चों के पेट में कभी कीडे नहीं पडे क्योंकि बचपन से ही उन्होंने हमारे घर में बिस्कुट के कभी दर्शन नहीं किये और आज भी वह इसे खाना पसंद नहीं करते। चाय के साथ खाखरा खायें, बिस्कुट नहीं।|
राजस्थान की मोटी रोटी :- राजस्थान की मोटी रोटी थोड़े घी का मोन डालकर करीब-करीब २० से ३० मिनट तक धीमी आँच परसिगडी पर सेंकी जाती है। यह रोटी २ मिनट वाली रोटी से बेहतर है। परंतु इसका प्रचलन भारत के अन्य प्रांतों में नहीं है।|
पराँठा पूरी से भारी होता है - पराँठा मोटी रोटी की तरह होती है जिसमें अगर घी का मोन ज्यादा है तो यह खतरनाक है, कम है तो ठीक है। इसे रोटी की तरह जल्दी सेंक लेते हैं। पराँठे पर घी या तेल डालते ही स्टार्च घी या तेल की गर्मी से शीघ्र सिंकने लगता है परंतु इस सिंकाई में घी-तेल सीधे तवे पर जल जाने के कारण अत्यंत हानिकारक हो जाते हैं इसलिये घर में जब परांठे बनते हैं तो पूरा घर धुँएं से भर जाता है और किचन जल्दी काला हो जाता है। यही हाल आपके पेट का भी होता है। ऐसा तला हुआ तेल और घी, शरीर को बहुत नुकसान पहुँचाता है। पराँठे भी शीघ्र सिंकने के कारण अध् पका स्टार्च होता है।|
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